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Showing posts from February, 2018

Priya Prakash Varrier Viral Videos

Priya Prakash Varrier is a model and an actress in Malayalam cinema who is known for the attention she gained on social media.  Wikipedia Parents :  Prakash Varrier   Trending Born :  12 September 1999 (age 18),  Punkunnam Movies :  Oru Adaar Love Upcoming movie :  Oru Adaar Love प्रिया प्रकाश का  वह विडियो भले ही मलयालम फिल्म का हिस्सा हो, लेकिन हर भाषाओं के लोगों ने उसे पसंद किया। अब 'अरु अदार लव' के वायरल हुए विडियो के गाने 'मानिक्य मलाराया पूवी' का हिन्दी वर्जन तैयार किया गया है।  सी मलयाली गाने के जो बोल को हिन्दी में गाकर उसका मतलब बताया गया है। इस गाने के  जो बोल को हिन्दी में गाकर उसका मतलब बताया गया है। इस गाने  के  बोल हैं...   आंखें तेरी कह रही हैं तुमको मुझसे प्यार है  तू कहे या ना कहे पर चेहरे पर इकरार है  चेहरे की मायूमियत भी चुपके से यह कह रही  धडकनों में तू मेरी अब सांसें बन कर रह रही  .....

डॉ. भीम राव अंबेडकर का जीवन परिचय

भारत को संविधान देने वाले महान नेता डा. भीम राव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ था। डा. भीमराव अंबेडकर के पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का भीमाबाई था। अपने माता-पिता की चौदहवीं संतान के रूप में जन्में डॉ. भीमराव अम्बेडकर जन्मजात प्रतिभा संपन्न थे। भीमराव अंबेडकर का जन्म महार जाति में हुआ था जिसे लोग अछूत और बेहद निचला वर्ग मानते थे। बचपन में भीमराव अंबेडकर (Dr.B R Ambedkar) के परिवार के साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव किया जाता था। भीमराव अंबेडकर के बचपन का नाम रामजी सकपाल था. अंबेडकर के पूर्वज लंबे समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्य करते थे और उनके पिता ब्रिटिश भारतीय सेना की मऊ छावनी में सेवा में थे. भीमराव के पिता हमेशा ही अपने बच्चों की शिक्षा पर जोर देते थे। 1894 में भीमराव अंबेडकर जी के पिता सेवानिवृत्त हो गए और इसके दो साल बाद, अंबेडकर की मां की मृत्यु हो गई. बच्चों की देखभाल उनकी चाची ने कठिन परिस्थितियों में रहते हुये की। रामजी सकपाल के केवल तीन बेटे, बलराम, आनंदराव और भीमराव और दो बेटियाँ मंजुला ...

बाबा साहब अंबेडकर ने बौद्धधर्म की दीक्षा ली ।

1956 में भारत में एक महान् चमत्कार देखने को मिला। दलित और पीड़ित जनता के हदय-सम्राट डा. बाबा साहब अंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को अशोक विजयादशमी के दिन नागपुर में अपने पाँच लाख साथियों के साथ बौद्धधर्म की दीक्षा ली । यह दिन भारत के इतिहास में ही नहीं, बौद्ध-संसार के इतिहास में भी सुवर्णाक्षरों में लिखा गया। आज बाबा साहब हमारे बीच नहीं हैं पर उनका बतलाया हुआ सच्चा और सीधा मार्ग हमारे सामने है। बाबा साहब की अभिलाषा पूरी करने की जिम्मेदारी आज समस्त भारत की है।

संवारा है विधि ने वह छण इस तरह से, दिया जब जगत को है उपहार ऐसा

संवारा है विधि ने वह छण इस तरह से, दिया जब जगत को है उपहार ऐसा । सुहाना महीना बसंती पवन थी, लिए जन्म 'बाबा' हुआ हर्ष ऐसा । पिता राम जी करते सेना में सेवा, मदिरा मांस जिसने कभी नहीं लेवा, माता जी भीमाबाई धर्म की विभूति थी, विनय-सद्भावना की साक्षात मूर्ति थीं, उनके प्रताप का प्रकाश प्राप्त कर के, हुआ सुत विलक्षण कोई जग न ऐसा ।। शिक्षा संगठन के थे वे पुजारी, अधिकार हेतु किए संघर्ष भारी, मानव मेँ रक्त एक, एक भाँति आये, स्वारथ बस होके जाति पाति हैं बनायें, युगो की यह पीड़ा रमी थी जो रग-रग, गहे अस्त्र जब वे गया दर्द ऐसा ।। देश के विधान हेतु संविधान उनका, हित है निहित जिसमें रहा जन-जन का. एकता अखंडता स्वदेश प्रेम भाये, धर्म वे स्वदेशी सदा अपनाये, छुवा-छूत मंतर छू करके भगाये सहे दीन दुखियों के हित क्लेश ऐसा ।। दिये उपदेश उसे सदा अपनायें, किसी के समक्ष कर नहीं फैलायें, मार्ग शांति का पुनीत कभी नहीं भूलें, श्रम अरु उमंग भाव गहि गगन छू लें, सदा दीप होगा ज्वलित जग में जगमग, लगें सब सगे 'राज' सबके सब ऐसा ।। - राज नारायण तिवारी

Rama bai

माता रमाई का जन्म 7 फरवरी1898 को वलंग गाँव में हुआ था। एक माँ जिसकी चार बच्चो की अकाल मृत्यु इलाज के अभाव में हुई थी, उसके हृदय की पीड़ा क्या होगी, उस माँ ने हिम्मत नहीं हारी वह मुंबई की सड़कों पर गोबर उठाती कन्डे बनाकर घर-घर बेचने जाया करती थी ताकि अपनी बच्चो का ईलाज करा सके! आज इंदु बहुत रो रही थी पूरा शरीर तप रहा था,माँ ने देखा कि बुखार बहुत तेज है बच्ची को गोद में उठाया, कंडे बेचकर जो पैसे जमा किये थे, उसे लेकर वेद्य के घर की तरफ दौड़ी..रास्ते में पत्र मिला जो विदेश से आया था जिसमें लिखा था-"रमा! सरकार से जो बजीफा मिलता है सारा किताबें खरीदने में चला जाता है,एक वक्त ही खाना खाता हूँ तुम्हारे पास कुछ पैसे हों तो भेज दो और हाँ अपने बच्चों का खयाल रखना में जल्द ही लोटूँगा।" माँ के सामने बड़ी परिक्षा!बेटी को बचाऐ या पति को पैसे भेजे! बच्ची के ईलाज के पैसे विदेश भेज दिये! अब गोद में सोई बेटी की साँसे रुक जाती हैं वह भी दुनिया छोड़ चली जाती है......माँ रो रही है,खाना पीना भूल चुकी है.. पर माँ तो माँ है हिम्मत नही हारी! जब बाबा साहब  पढ़ाई कर विदेश से लोटे तो बोले:-रमा! इतना ...

The Symbol of Knowledge in The World

Dr. B.R. Ambedkar is considered as symbol of knowledge in the world Dr. Ambedkar's efforts and the hardships he faced were our inspiration. Even when he suffered a major health scare, my father insisted on continuing our education and always cited Dr. Ambedkar's example. Though he knew he couldn't afford to pay for it, he tried every means to pay for it, until he couldn't do any more. And I am sure there are many more like me who consider him to be their guiding light. His life is an inspiration for us. And so without going ahead with my story, i would like to say that for every citizen who has truly understood the meaning of education and I m not talking just bookish, he is a true inspiration. A voracious reader, borrowed money to read books, went without any food to save for books and strived tirelessly for the cause of the downtrodden. There is a reason he is cited as the Architect of the Indian Constitution. His knowledge was vast and actually put it ...